सबसे अच्छा सोलर पैनल कोन सा है और २०२१ में किस तरह का सोलर पैनल लगवाये

सबसे अच्छा सोलर पैनल कोन सा है? इस सवाल या इस परेशानी का हल या जवाब हासिल करने के लिए आगे दी हुई जानकारी को ध्यान से पढ़े। 

दोस्तों आज के इस आधुनिक युग में बिजली के बिना जीवन व्यतीत करना लगभग ना के ही बराबर है।

 

आजकल सरकार की मदद से हर एक गांवगांव में बिजली पहुंचने लगी है लेकिन अब लोग बिजली के बिल से छुटकारा पाना चाहते हैं ऐसे में हमें नजर आता है एक फ्री एनर्जी सोलर ऊर्जा स्रोत या कहे ग्रीन एनर्जी के बारे में दोस्तों यह बिजली पैदा करने का एक बहुत ही अच्छा स्रोत है साथ ही साथ यह सबसे ज्यादा टिकाऊ भी है। 

दोस्तों इसमें एक बार आपका इन्वेस्टमेंट लगता है उसके बाद यह आपको वर्षों तक ऊर्जा प्रदान करता रहता है और यही वजह है कि आज पूरे भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल जोर शोर से किया जा रहा है और इस क्षेत्र में भारत भी बाकी देशों से आगे निकलता जा रहा है। और रहे भी क्यू ना क्युकी आज दुनिया सौर ऊर्जा क्षमता में भारत का पांचवा क्रमांक लगता है और भविष्यमें  भारत की सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता और भी बढ़ने वाली है। 

 

वही दोस्तों अगर आप भी चाहते हैं एक अच्छा सा सोलर पैनल खरीदना  तो आप सही जगह आकर यह जानकारी हासिल कर रहे है क्यूकी हम आपको बतायंगे कौन सा सोलर पैनल आपके लिए अच्छा साबित हो सकता है आपके किन इस्तेमालो के लिए कौन सा सोलर पैनल चाहिए चलिए उन सभी बातों को हम पूरे विस्तार से उल्लेख की मदद से स्टेप बाय स्टेप आपको बताने जा रहे है हैं बस आपसे निवेदन यही रहेगा कि आप इस पूरे लेख को पूरे ध्यान से और बिना किसी दिन पैराग्राफ को मिस किए पूरा पढ़े। 

 

तो चलिए दोस्तों हम जानेंगे की २०२१ में सबसे अच्छा सोलर पैनल कौन सा अच्छा है जोकि आपके घरेलु और कामकाज की जगह आपके काम आये। तो चलिए दोस्तों अपने ज्ञान को बढ़ाते है। 

 

 

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सोलर सिस्टम सौर ऊर्जाउत्पन्न करने की एक ऐसी तकनीक है जो सूर्य की रोशनी यानी कि धूप के जरिए भारी मात्रा में बिजली उत्पन्न करती है उसी को सोलर सिस्टम कहा जाता है ऊर्जा का एक ऐसा स्रोत है जो ऊर्जा उत्पन्न करने में किसी भी प्रकार का कोई प्रदूषण नहीं फैलाता और साथ ही यह प्रदूषण मुक्त ऊर्जा भी पैदा करता है। 

 

सौर ऊर्जा को  इस्तेमाल करने के लिए किसी भी प्रकार का इंधन जिसे पेट्रोल डीजल जैसी चीजों की आवश्यकता नहीं होती है और ना ही कोई बिजली उपयोग में लिया जाता है क्योंकि यह सिर्फ और सिर्फ सूर्य की रोशनी से ही उर्जा उत्पन्न करता है।

 

एक पूरा सोलर सिस्टम तैयार करने के लिए आपको सोलर पैनल चाहिए तथा एक इनवर्टर चाहिए और एक अच्छी सी पावरफुल बैटरी चाहिए इन दोनों को एक साथ जोड़ने के बाद आप सोलर पैनल को धूप में रख दें जिससे सोलर पैनल धूप को सेक कर बिजली या सौर ऊर्जा उत्पन्न कर इनवर्टर द्वारा बैटरी को चार्ज करेगा और आप बैटरी द्वारा घर तथा दुकान के इलेक्ट्रिक उपकरणों का इस्तेमाल कर सकेंगे। 

 

किस प्रकार का सोलर पैनल लगवाएं?

 

दोस्तों मार्केट में आजकल आपको बहुत सारे अलगअलग रंग और प्रकार के सोलर पैनल देखने को मिल जाएंगे लेकिन उन सभी सोलर पैनल के बस कलर और डिजाइन के लिए नहीं बदले जाने जाते बल्कि उनके कलर से यह जाने जाते हैं कि वह सोलर पैनल किस तरह का है और कितना पावरफुल है और किस प्रकार के कामों में उस सोलर पैनल का इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

वही हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सोलर पैनल जैसी चीजें सिलिकॉन धातु से ही बनाए जाते हैं सिलिकॉन धातु रेत से बनाए जाते हैं वहीं रेत पृथ्वी पर ऑक्सीजन के बाद दूसरी सबसे ज्यादा पाई जाने वाली चीज है और सिलिकॉन से मुख्यतः तीन प्रकार के सोलर पैनल बनाए जाते हैं जो कि इस प्रकार हैं

 

  • मोनो क्रिस्टलाइन सोलर पैनल (Mono Crystalline Solar Panel)
  • पॉली क्रिस्टलाइन सोलर पैनल (Polycrystalline Solar Panel)
  • थिन फ़िल्म सोलर पैनल (Thin film solar panel)

 

ऊपर दिए गए तीन्हो प्रकारो का हम आगे वर्णन करने वाले है और आपको बताएँगे की सबसे अच्छा सोलर पैनल कौन सा है।  

 

 

मोनो क्रिस्टलाइन सोलर पैनल | Mono Crystalline Solar Panel 

 
मोनो क्रिस्टलाइन सोलर पैनल

 

Mono Crystalline सोलर पैनल में आपको ब्लैक कलर पैनल  देखने को मिलेगी और इसमें आपको प्योर क्वालिटी का सिलिकॉन सेल मिलता है क्योंकि रॉ सिलिकॉन में से प्योर सिलीकान निकालना थोड़ा सा मुश्किल और महंगा पड़ता है इसलिए मोनोक्रिस्टलाइन सोलर पैनल का प्राइस बाकी के सोलर पैनल से थोड़ा ज्यादा पड़ता है। 

 

अगर बात करें इसके पावर की तो आपको Mono Crystalline  सोलर पैनल में पावर उत्पन्न करने की क्षमता बाकी के अन्य सोलर पैनल से ज्यादा मिलती है मोनोक्रिस्टलाइन सोलर पैनल 20 से 22% सौरऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में कन्वर्ट कर सकता है। 


अगर आप किसी भी कंपनी से इस तरह के Mono Crystalline सोलर पैनल खरीदते हैं तो वह कंपनी आपको 5 साल की फुल पावर आउटपुट गारंटी देती है और सोलर पैनल के 20 साल तककरीब 80% तक आपकोऊर्जा देने की वारंटी देता है यानी कि 1 बार खर्च करने पर आपको 20 से 25 सालतक पूरी तरह से मुफ्त बिजली मिल सकती है। 

क्यों ले मोनो क्रिस्टलाइन सोलर पैनल

 

Mono Crystalline सोलर पैनल ऐसे क्षेत्र के लिए सबसे अच्छा और फायदेमंद साबित होगा जो क्षेत्र ऊंचाई वाले या फिर ज्यादा ठंडे इलाके में से है और जहां धूप काफी कम समय के लिए निकलती है और मौसम टांडा रहता हो तो ऐसी जगहों के लिए आप Mono Crystalline जैसे सोलर पैनल का इस्तेमाल कर सकते हैं क्योंकि यह सोलर पैनल कम धूप में भी काफी बढ़िया काम करता है और ज्यादा से ज्यादा ऊर्जा एकत्रित करता है। 

 

इस तरह के सोलर पैनल अगर आप अच्छी कंपनी का खरीदने जाएंगे तो आपको ₹50 प्रति व्हाटयानी कि 100 वाट कामोनोक्रिस्टलाइन सोलर पैनल आपको लगभग ₹5000 हजार रुपएखर्च करने पर मिल जाएगा

 

पॉली क्रिस्टलाइन सोलर पैनल | Polycrystalline Solar Panel 

पॉली क्रिस्टलाइन सोलर पैनल

 

Polycrystalline सोलर पैनल या फिर जिसे हम Multi-Crystalline Silicon भी कहते हैं यह सोलर पैनल बाजार में सबसे पहली बार साल 1981 में आयाथा। इस तरह के सोलर पैनल की कीमत मोनोक्रिस्टलाइन सोलर पैनल की अपेक्षा में थोड़ा कम पड़ती है क्योंकि इस सोलर पैनल में सिलिकॉन की प्योरिटी की मात्रा थोड़ी कम होती है वहीं पॉली क्रिस्टलाइन सोलर पैनल को गर्म वाले क्षेत्र में लगाया जाता है। 

 

बात करे इसकी कीमत आपको ₹30 से ₹40 प्रतिव्हाट लगेंगे यानी कि आपको 100 वाट केसोलर पैनल खरीदने के लिए लगभग ₹4000 खर्च करनेपड़ेंगे और इसकी लाइफ की बात करें तो इसकी लाइफ भी 20 से 25 सालकी होती है और कंपनी आपको 20 साल की वारंटी भी देती है। 

 

जैसा कि Polycrystalline सोलर पैनल की बिक्री Mono Crystalline सोलर पैनल के मुकाबले ज्यादा होती है इस वजह से यह सोलर पैनल थोड़े सस्ते भी पढ़ते हैं और इसके सस्ते होने की वजह यह भी है कि इसमें आपको 15 से 18% efficiency रेट मिलती है उसका मतलब यह सोलर पैनल 15 से 18% तकही बिजली बनाने में सक्षम होता है। 

 

थिन फ़िल्म सोलर पैनल | Thin Film Solar Panel 

 

थिन फ़िल्म सोलर पैनल

 

Thin film solar panel कोसिलिकॉन धातु के साथसाथ और भी अन्य धातुओं को मिलाकरबनाया जाता है और इनकी कीमत Polycrystalline सोलर पैनल और मोनोक्रिस्टलाइन सोलर पैनल की अपेक्षा में बहुत ही कम होती हैं और बात करें इनके आकर और बनावट की तो यह सोलर पैनल बहुत ही पतले होते हैं इतने पतले कि आप इससे किसी प्लास्टिक पन्नी की तरह मोड़ भी सकते हो। 

 

लेकिन इसके बिजली बनाने की क्षमता 9% से 12% तक कीही होती है इस तरह के सोलर पैनल आपको अपने Calculator में ज्यादातर देखने को मिलेंगे वहीं अगर वही इस तरह के सोलर पैनल का इस्तेमाल घडिया, छोटे टोर्च आदि में इस्तेमाल किये जाते है तो आप इस तरह के सोलर पैनल भी लगाकर अपने पैसे बचा सकते हो हालांकि इस तरह के सोलर पैनल को कुछ अलग कैटेगरी में भी बांटा गया है जैसे– 

 

  • Amorphous silicon (a-Si)
  • Cadmium telluride (CdTe)
  • Copper indium gallium selenide (CIS/CIGS)
  • Organic photovoltaic cells (OPC)

 

उपकरणों के उर्जा लोड को जाने

 

कई सारे लोग एक सोलर सिस्टम खरीदने से पहले यह गलती कर बैठते हैं कि वह बिना सोचे समझे सोलर सिस्टम लगवा देते हैं क्योंकि लोगो को पता ही नहीं होता कि कितने बड़े सोलर सिस्टम पर कितना उर्जा लोड चला सकते हैं। 

 

आप हमारी इस लेख पर आए हैं तो आप भी ऐसी गलती बिल्कुल ना करें सबसे पहले तो आप अपने घर या फिर दुकान में लगे बिजली से चलने वाले ऐसी उपकरणों जिसे आप सोलर सिस्टम पर चलाना चाहते हैं उसका लोड पता कर ले। इन उपकरणों का लोड कैसा निकल ते है वो आगे बतायेंगे। 

 

  • 5 LED bulb- 20 watt per bulb 20w×5=100 watt
  • 3 ceiling fan- 80 watt per fan 80w×3=240 watt
  • 32 inch LED TV – 60 watt
  • 1 air conditioner- 1200 watt

Total- 100 watt + 240 watt + 60 watt + 1200 watt= 1800 watt (1.8 kw) 

 

इसका मतलब आपके घर में उपकरणों का लोड 2000 वाट हैयानी कि आप को कम से कम अपने घर के लिए 2000 वाट (2KW) कासोलर सिस्टम लगवाना पड़ेगा वहीं अगर आप ऑफ ग्रिड सोलर सिस्टम लगवाना चाहते है तो आपको इस में बैटरी चार्ज करने के लिए भी पावर की आवश्यकता होगी इसलिए आपको 2000 वोट सेज्यादा बड़ा सोलर सिस्टम ही लगवाना चाहिए। 

 

 आप जब भी सोलर सिस्टम पर इतनी लोड को चलाएंगे तब आपको उस समय उस बैटरी को भी चार्ज करवाना पड़ेगा इससे होगा यह कि जब भी सोलर पैनल से सप्लाई आना बंद हो जाएँगी तब आपके उपकरण बैटरी से भी चल सकते है तो इसका मतलब आप को ऑफ ग्रिड सोलर सिस्टम कम से कम 2.5 kw का लगवानाचाहिए।

अगर बात करें कितने किलो वाट पर आपको कितने खर्च करने पड़ सकते हैं तो अगर आप बाजार में कम से कम लगभग 1 किलो वाट का ऑफ ग्रिड सोलर सिस्टम लगवाने जाएंगे तब आपको कम से कम ₹9000हजाररुपएखर्च करने पड़ सकते हैं

 

वहीं अगर आपको अपनी उपकरण काफी लंबे समय तक इस्तेमाल करने हैं तो आप इसके लिए ज्यादा से ज्यादा बैटरी भी लगवा सकते हैं जैसे कि मान लीजिए आपको 150 AH की बैटरी 4 घंटे बैकअप देता है तब यहां आपको अगर 8 घंटे बैकअप चाहिए तो तब आप वैसे दो बैटरी का इस्तेमाल कर सकते हैं जिससे आपको आपके हिसाब से बैटरी बैकअप मिल जाएगा। 

 

 

२०२१ की बेस्ट सोलर सप्लायर कम्पनिया 

 

अगर आप इस बात को लेकर कंफ्यूज हो रहे हैं कि सबसे अच्छा सोलर पैनल किस कंपनी का होता है तो मैंने अपनी लिस्ट में कुछ सबसे अच्छे और  पॉपुलर कंपनी के नाम लिखे हैं जिस आधार पर आप थोड़ा सा ट्रस्ट इन कंपनियों पर कर सकते हैं। 

 

 

  • Luminous
  • Waaree
  • Tata Solar
  • Microtek
  • Adani 
  • Patanjali

 

इन कंपनियों के सोलर पैनल भारतीय बाजार में बहुत ही जोरों शोरों से बिक रही है और यह सभी कंपनियां पॉली क्रिस्टल और मोनो क्रिस्टल जैसे सोलर पैनल भी बनाती है और अगर आप हमारी राय पूछे कि आपको सबसे अच्छा सोलर पैनल कौन सा लेना चाहिए यानी कि Mono Crystalline सोलर पैनल या Polycrystalline.

 

सोलर पैनल तो मेरे ख्याल से आपको Mono Crystalline सिलीकान सोलर पैनल ही लेना चाहिए क्योंकि इस सोलर पैनल के बिजली बनाने की क्षमता बाकी अन्य सोलर पैनल से काफी अधिक है हालांकि इस प्रकार  पैनल  थोड़ा महंगा पड़ेंगा लेकिन आपका वन टाइम इन्वेस्टमेंट लॉन्ग टाइम के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा। 

 

 

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समापन

 

दोस्तों हम उम्मीद करते हैं कि सबसे अच्छा सोलर पैनल कौन सा है इस से जुड़ी आपके सभी तरह के वालों के जवाब हमारे इस लेख में मिल गए होंगे अगर आप चाहते हैं कि आपके दोस्त और परिवार भी एक अच्छा सोलर पैनल खरीद पाए तो आप उन्हें भी हमारा यह लेख शेयर कर सकते हो। 

 

साथ ही आप हमारे इस वेबसाइट पर दी गई और भी महत्वपूर्ण जानकारियां पढ़कर अपना ज्ञान या फिर अपनी परेशानियों का हल निकाल सकते हो हम आपसे मिलेंगे ऐसे ही किसी इंफॉर्मेशन लेख के साथ तब तक के लिए धन्यवाद, जय हिन्द। 

 

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