calculator का अविष्कार किसने किया | Calculator ka avishkar kisne kiya

 
दोस्तों कहते हैं कि हर समस्या का समाधान ही एक नया अविष्कार की जननी होती है जब से हमारी इस धरती पर जीवन का आरंभ हुआ है तब से लेकर अब तक अविष्कार ही इंसान की तरक्की का जरिया बना हुआ है और तब से अब तक अविष्कार पर अविष्कार होते ही जा रहे हैं अगर हम याद करने की कोशिश करें उन सभी आविष्कार और आविष्कारक के नाम तो हमें साल भर लग जाएंगे उन सभी के बारे में जानने के लिए। 
 
Calculator का हमारे जीवन में कितना महत्व रहा है और अभी भी है यह हम सब भूल नहीं सकते छोटे से लेकर बड़े हिसाब तक हम सभी केलकुलेटर का ही इस्तेमाल करते हैं इसका इस्तेमाल ज्यादातर बड़ी बड़ी संख्या में जैसे जोड़, घटा, गुणा, भाग आदि करने के लिए किया जाता है यानी कि इसका इस्तेमाल हम तभी करते हैं जब किसी बहुत ही बड़ी कठिन संख्याओं को जोड़ना या घटाना या भागकार करना होता है। 

 

अगर आप भी यह जानना चाहते हैं कि Calculator ka avishkar kisne kiya | केलकुलेटर का आविष्कार किसने किया और कब किया तो यह पूरा लेख आपके लिए है क्योंकि आज के इस पूरे लेख में हम बात करने वाले हैं केलकुलेटर का आविष्कार किसने किया और कब किया कैलकुलेटर का इतिहास क्या है और Calculatorसे जुड़े 10 अमेजिंग फैक्ट्स दोस्तों आज के इस पूरे लेख में हम जानेंगे तो पूरा पढ़े इस हमारे लेख को हम उम्मीद करते हैं कि आपको जरूरत से ज्यादा ही चीजें जानने को मिलेगी।

 

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कैलकुलेटरका अविष्कार किसने किया

 

विल्हेम शिकार्ड-कैलकुलेटर की खोज करने वाला वैज्ञानिक
Wilhelm Schickard
 

वैसे तो 17 वी शताब्दीमें केलकुलेटर का इस्तेमाल हुआ करता था लेकिन उस वक्त नंबरों की गणना करने के लिए मैकेनिकल कैलकुलेटर बनाया गया था जिसका आविष्कार 1642 ईस्वी मेंविल्हेम शिकार्डद्वारा किया गया था जिसका नाम उन्होंने ब्लेज पास्कल रखा था।  

 

जैसेजैसे वक्त बीतता गया उसके बाद केलकुलेटर में धीरेधीरे कई सारे बदलाव किए गए थे जिसके बाद 19 वीं शताब्दी के आधुनिक क्रांति के बाद कई सारे बदलाव केलकुलेटर में किए गए थे वही अमेरिका के जेम्स एल डाल्टन जिन्होंने डाल्टन एडिंग मशीन का आविष्कार किया गया था और उन्होंने 1948 ईस्वी मेंCurta Calculator बनाया लेकिन यह केलकुलेटर दाम में बहुत ही ज्यादा महंगा हुआ करता था मगर इस कैलकुलेटर से बड़ीबड़ी और कठिन संख्याओ की गणना आसानी से कि जा सकता थी। 

 

उसके बाद साल 1960 में इलेक्ट्रॉनिक वाले केलकुलेटर बनाने शुरू किए गए जिसका काम लगभग आज के केलकुलेटर जितना ही था यानी कि इस केलकुलेटर को कोई भी व्यक्ति बड़े आसानी से अपने जेब में रख सकता था और आसानी से कहीं भी ले  जा सकता था। 

 

साल 1960  मेंसबसे छोटे आकार का इलेक्ट्रिक केलकुलेटर का आविष्कार किया गया उसके बाद 1970 ईस्वी में Busicom नाम की जापान की कंपनी इंटेल कंपनी के साथ मिलकर एक मॉडर्न केलकुलेटर को बनाया था जिससे बड़ी मुश्किल से मुश्किल गणना को चुटकी में आसानी से हल किया जा सकता था।

 

इसकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि इन कंपनियों द्वारा बनाया गया यह मॉडर्न केलकुलेटर को कोई भी व्यक्ति अपनी पॉकेट में रख कर कहीं भी जा सकता था जी हां यह डिजिटल केलकुलेटर वही केलकुलेटर है जिसका इस्तेमाल आज हम लोग कर रहे है। 

 

कैलकुलेटर का इतिहास क्या है?

 
 

वैसे तो दोस्तों आप सभी केलकुलेटर के बारे में कुछ जानते ही होंगे यह एक तरह का पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस होता है बड़े से बड़े गणित की गणना चुटकी भर में कर देता है वैसे तो आजकल कैलकुलेटर हमारे स्मार्टफोन और कंप्यूटर में भी देखने को मिल जाते हैं। 

 

आजकल के केलकुलेटर में आपको सोलर पैनल भी देखने को मिल जाते हैं जिसकी मदद से आप अपने केलकुलेटर को धूप में भी चार्ज करके लंबे समय तक इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन पहले के जमाने में केलकुलेटर किस रूप में था कैसा था तो चलिए उनके इतिहास के बारे में भी हम जानेंगे

 
 

आधुनिक केलकुलेटर की अविष्कार से पहले की संख्याओंकी गणना कैसे की जाती थी?

 
 

आज से करीब 32 हजार सालपहले के लोग किसी भीसख्याओ की गणना करने के लिए ईशानगो हड्डी का उपयोग करते थे दरअसल इस तरह के हड्डियों से किसी भी पत्थर पर आसानी से लकीर बनती थी और लबे समाया तक रहती थी जिसकी मदत से उस  वक़्त के लोग गणना करते थे। 

 

लेकिन हड्डियों के माध्यम से गणना करना थोड़ा मुश्किल होता था इसलिए संख्याओं का गणना करने के लिए आज से करीब 2700 साल पहलेअबेकस की खोज की गई थी जो एक तरफ से अपने वक्त की सबसे पहली कैलकुलेटिंग मशीन थी जिससे हिंदी और अरेबिक संख्या की गणना करने के लिए बनाया गया था। 

 

असल में यह एक लकड़ी और प्लास्टिक से बनी हुई थी जिसमें छोटीछोटी फ्रेम सामान पर रखकर एक अनोखे किस्म का बनाया गया था जिसकी मदद से गणना करना थोड़ा आसान था।

 

आपकी जानकारी के लिए बता दें उस वक्त गणना करने के लिए इस्तेमाल में लाए जाने वाले यंत्र में 1 से लेकर 9 तक की ही संख्याएं होती थी इसमें लोग फ्रेम को घटा बड़ा कर बड़ी गणना किया करते थे हालांकि उस समय के लोग इस यंत्र से बड़ी बड़ी गणना ही किया करते थे क्योंकि इसमें गणना करने के लिए भी थोड़ा ज्यादा समय लगता था। 

 

स्लाइडनियम

 

 

जब 16वीं शताब्दी में जॉन नेपियर नाम के गणितज्ञ ने गणित पेश्नो को हल करने के लिए एक अलग तरीके का एल्गोरिदम बनाया जिसमें दो तरह की प्रक्रिया लगी होती थी जो एक दूसरे के आपस में शिफ्ट होती रहती थी जिसकी मदद से बड़ी कठिन संख्याओं का गणना किया करते थे

 
 

दुनिया का पहला आधुनिक कैलकुलेटर

 

 

दुनिया का पहला आधुनिक कैलकुलेटर
 
 
अगर बात करें दुनिया की पहली मॉडल कैलकुलेटर की तो स्टेप्पेड रेकोनर एक तरह से दुनिया का सबसे पहला आधुनिक केलकुलेटर था जिसकी खोज गोटफ्राइड वॉन लाइबनिट्स ने किया था। इस केलकुलेटर की मदद से अर्थमैटिक ऑपरेशन जैसे ही गुना भाग घाटा करना बहुत ही आसान हो गया था।
 

पहला सफल मशीनी कैलकुलेटर

 
 

अरिथमोमीटर दुनिया की सबसे पहली सफल मशीनी केलकुलेटर थी जिसे 1820 में थॉमसडे नाम के साइंटिस्ट ने इजाद किया था जिसका इस्तेमाल साल 1851 से 1890 ईसवीतक सबसे ज्यादा किया गया था क्योंकि इसमें जोर घटाओ गुणा भाग बहुत ही आसानी से किया जा सकता था और यह मशीनी केलकुलेटर काफी हद तक सफल भी रहा था। 

 

कीबोर्ड की सुविधा से लैस कैलकुलेटर

 
 

वर्ष 1887 मेंमशीनी केलकुलेटर को अब थोड़ा बहुत अपडेट करने के बाद उसमें कीबोर्ड जोड़ दिया गया था और इस तरह के केलकुलेटर को पास्कल कैलकुलस यंत्र के जैसा बनाया गया था इस कैलकुलेटर में सबसे खास बात यह थी कि एक तरह से केलकुलेटर कीबोर्ड के साथ आधुनिक भी था और इसमें प्रिंटिंग करने जैसी सुविधा भी उपलब्ध थी। 

 

प्रोग्रामैटिक डिवाइस

 

दोस्तों आज जो हम मोबाइल फोन या फिर स्मार्ट वॉच देखते हैं वह सब प्रोग्राम ही होते हैं लेकिन दुनिया का सबसे पहला प्रोग्राम से काम करने वाला केलकुलेटर प्रोग्रामैटिक डिवाइस था।

 

 

बेहद आसानी से होती थी संख्या की गणना

 

 
 

दोस्तों  बात करें लगभग आज के समय के कैलकुलेटर की बेहद जलद  स्पीड से काम करने वाली केलकुलेटर की तो इसका आविष्कार साल 1893 में लेओन बोली ने मिलिनेयर डिवाइस नाम के डिवाइस की खोज की थी इसकी सबसे खास बात यह थी कि यह किसी भी संख्याओं की गणना कुछ ही मिनटों में कर देता था। 

 

इसी तरह से सालों साल नएनए लोग आते रहे और टेक्नोलॉजी उन्नति करती रही और इसी तरह से केलकुलेटर धीरेधीरे अपडेट होते रहे और आज हम देख सकते हैं कि आज हमारे पास केलकुलेटर किस रूप में है।

 

बात करे आज की अब तो लगभग केलकुलेटर का इस्तेमाल भी कई सारे लोग ना के बराबर करते हैं क्योंकि केलकुलेटर जैसी चीज प्रोग्रामिंग द्वारा हमारे फोन में ही मौजूद होती है फोन की भी बात ना करें तो अपने फोन में गूगल पर भी सर्च करके कैलकुलेटर इस्तेमाल कर सकते हैं। 

 

हालांकि हमें केलकुलेटर का इस्तेमाल छोटे से छोटे गणना करने के लिए भी नहीं करना चाहिए यानी किसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से हमें केलकुलेटर का इस्तेमाल करने की आदत बन जाती है और फिर जब हमारे पास केलकुलेटर नहीं होता तो हमें छोटेमोटे गणना करने के लिए भी  बहुत ही ज्यादा परेशानी होती है। 

 
 

केलकुलेटर से जुड़े 10 अनसुने रोचक तथ्य

 

  • क्या आप जानते हैं कंप्यूटर एक केलकुलेटर का ही अपडेट वर्जन है यानी कि केलकुलेटर के आधार पर ही कंप्यूटर का अविष्कार किया गया था।
  • दुनिया के सबसे पहले डिजिटल केलकुलेटर का आविष्कार ब्लेज पास्कल ने साल 1642 ई. में किया था। 
  • Casio कंप्यूटर कंपनी ने सबसे पहले साल 1957 ई में कमर्शियलाइस्ड इलेक्ट्रॉनिक केलकुलेटर लॉंच  किया था जिसकी सुंदर बनावट और उनके आकार ने लोगों को अपनी और आकर्षित किया।
  • साथ ही Casio कंपनी ने कंप्यूटर स्मार्टफोंस और टेबलेट के ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे कि Android windows iOS Mac के लिए केलकुलेटर का सॉफ्टवेयर भी बनाया जिसकी मदद से आज हम अपने स्मार्टफोंस टेबलेट और कंप्यूटर के स्क्रीन पर कैलकुलेटिंग कर सकते हैं।
  • केलकुलेटर शब्द लैटिन शब्द calculare से लिया गया है इसका मतलब पत्थर के इस्तेमाल से काउंटिंग करना होता है यानी कि लेटिन शब्द में पत्थर के इस्तेमाल से काउंटिंग करने को calculare कहते थे। 
  • जब पहले के समय में कोई नंबर exist ही नहीं करता था तब उस समय के लोग इंसान और जानवरों के हाथ पैरों के उंगलियों का इस्तेमाल करके किसी भी चीज की गणना किया करते थे।
  • Abacus ही एक ऐसा इकलौता यंत्र था जिसकी मदद से मानव सभ्यता ने कैलकुलेटिंग मशीन की पहली शुरुआत की थी। 
  • अगर आप रियल lcd वाले केलकुलेटर पर 0.7734 लिखोगे और उसे उल्टा करके देखोगे तो आपको HELLO लिखा हुआ नजर आएगा ऐसे ही करके आपके सारे नंबर लिखकर अलग-अलग अंग्रेजी शब्द बना सकते हैं। 
  • केलकुलेटर का इस्तेमाल गणित बनाने वाले और व्यापारी ही नहीं करते बल्कि इंजीनियर साइंटिस्ट और आर्किटेक्ट जैसे लोगों के लिए भी एडवांस केलकुलेटर आते हैं। 
  • दुनिया की सबसे पहेली केलकुलेटर मशीन का नाम पास्कलाइन है जिसे 1644 में फ्रांसीसी गणितज्ञ blaise pascal द्वारा बनाया गया था असल में पास्कलाइन को अंकगणित मशीन भी कहा जाता हैं।
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समापन

 

दोस्तों अब आपको जानकारी मिल गई होंगी की Calculator ka avishkar kisne kiya | कैलकुलेटर का आविष्कार किसने और कब किया और कैलकुलेटर से जुड़े बहोत सी बाते। मुझे उम्मीद है कि आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा। 

 

हमने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की कि आपको महत्वपूर्ण जानकारियां अपनी इस लेख की मदद से दे सके और हम उम्मीद भी यही करते हैं कि आपको केलकुलेटर से जुड़े सभी महत्वपूर्ण जानकारियां और उनके इतिहास के बारे में पूरी जानकारी मिली होगी। 
 
और हम आपसे निवेदन करते हैं कि अगर आपको यह जानकारी पसंद आई हो तो आप इसे खुद तक ही सीमित ना रखें इसे अपने दोस्त और परिवारों के साथ भी जरूर साझा करें और अगर आपको हमारी वेबसाइट पर अपलोड किए गए और भी कई सारी Infornative जानकारियां जाननी है तो आप हमारे वेबसाइट पर पढ़ सकते हैं हम उम्मीद करेंगे कि आप हमारे वेबसाइट पर दोबारा आए धन्यवाद, जय हिन्द। 

 

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